High CourtsSingle Bench(2019) 01 RAJ CK 0347

Union Of India And Ors vs Smt. Bhagwati Devi

Rajasthan High Court · Decided on 16 January 2019

HON’BLE JUDGES
Mahendra Maheshwari, J
CASE NUMBER
Civil Second Appeal No. 2 Of 2000

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Judgment

11 paragraphs · 580 words

अपीलार्थी/प्रतिवादी की ओर से यह द्वितीय अपील विद्वान अपर जिला न्यायाधीश, झुन्झुनु द्वारा दीवानी अपील नियमित अपील संख्या 19/98 (52/98) में पारित निर्णय एवं डिक्री दिनांक 6.10.1999, जिसके तहत विद्वान अधीनस्थ न्यायालय सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ खंड) नवलगढ द्वारा दावा संख्या 59/93 में पारित निर्णय एवं डिक्री दिनांक 16.1.1998 की पुष्टि की गई, से व्यथित होकर प्रस्तुत की गई है।

आज अपीलार्थी की ओर से श्री सुगन सिंह शेखावत अधीक्षक, पोस्ट-आफिस झुन्झनु उपस्थित हैं, जिनको अधिवक्ता श्री गौरव जैन द्वारा शिनाख्त किया गया। अपीलार्थी ने न्यायालय के समक्ष प्रकट किया कि वह वादग्रस्त संपत्ति का खाली कब्जा बिना किसी बाधा के प्रत्यर्थी को एक साल में अर्थात् दिनांक 16.1.2020 तक संभला कर रसीद प्राप्त कर लेगा, अतः उसे उक्त अवधि तक परिसर खाली करने हेतु समय प्रदान किया जावे। इस क्रम में उसके द्वारा एक अंडरटेकिंग भी प्रस्तुत की गई, जिसे अभिलेख पर लिया जाता है।

प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि उक्त अवधि तक परिसर का खाली कब्जा प्रत्यर्थी को संभलाया जाता है तो प्रत्यर्थी को कोई आपत्ति नहीं है।

सुना गया एवं विचार किया गया तथा अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अंडरटेकिंग में अंकित तथ्यों का अवलोकन किया गया।

स्वीकृत रूप से अपीलार्थी की ओर से प्रस्तुत उक्त शपथ पत्र में अपीलार्थी ने विवादित परिसर का कब्जा एक साल में प्रत्यर्थी को संभलाये जाने के वचन के साथ-साथ विवादित परिसर का निर्धारित मध्यवर्ती लाभ समय पर अदा किए जाने तथा उक्त सम्पत्ति किसी तृतीय पक्ष को अंतरित नहीं किए जाने, सब-लेट नहीं किए जाने व कब्जा किसी अन्य पक्ष को नहीं दिए जाने का भी वचन दिया है। अपीलार्थी की ओर से प्रस्तुत उक्त अंडरटेकिंग के क्रम में प्रत्यर्थी की ओर से कोई आपत्ति प्रकट नहीं की गई।

परिणामस्वरूप अपीलार्थी की ओर से इस द्वितीय अपील के गुणावगुण पर कोई बहस नहीं कर वादग्रस्त परिसर को खाली करने हेतु स्वेच्छया से एक साल में अर्थात् दिनांक 16.1.2020 तक तक समयावधि प्रदान किए जाने के क्रम में दिए गये प्रस्ताव एवं प्रत्यर्थी की ओर से दी गई सहमति को ध्यान में रखते हुए, यह द्वितीय अपील निम्नानुसार निस्तारित की जाती हैः-

1- अपीलार्थी/प्रतिवादी वादग्रस्त परिसर का खाली कब्जा बिना किसी बाधा के एक साल में अर्थात् दिनांक 16.1.2020 तक प्रत्यर्थी/वादी को संभलाकर रसीद प्राप्त कर लेगा तथा उक्त अवधि में वादग्रस्त परिसर में न तो किसी प्रकार की तोडफोड करेगा और न ही परिसर किसी अन्य को सबलेट करेगा या कब्जा संभलायेगा,

3- अपीलार्थी जनवरी, 2019 तक का पूर्व निर्धारित बकाया किराया/मध्यवर्ती लाभ, यदि कोई है, तो उसे आगामी दो माह में प्रत्यर्थी द्वारा बताये गये बैंक खाते (बचत खाता संख्या 68000822800 बैक ऑफ महाराष्ट्र, ब्रांच सेन्ट्रल स्पाईन, विद्याधर नगर जयपुर) में जमा करायेगा अथवा नकद देकर रसीद प्राप्त करेगा एवं तत्पश्चात् प्रत्येक माह की 15 तारीख तक किराया/मध्यवर्ती लाभ के रूप में 425/-रूपये नकद अथवा बैंक के माध्यम से अदा करता रहेगा,

4- अधीनस्थ न्यायालय में प्रत्यर्थी की ओर से यदि प्रस्तुत इजराय की कार्यवाही लम्बित हो तो इजराय की कार्यवाही इस निर्देश के साथ स्थगित की जाती है कि अपीलार्थी द्वारा उक्त अवधि तक वादग्रस्त परिसर का खाली कब्जा प्रत्यर्थी को संभलाने में अथवा किराया अदायगी में चूक किए जाने की स्थिति में इस आदेश की अवमानना मानी जाऐगी एवं इस क्रम में प्रत्यर्थी अधीनस्थ न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर, बकाया किराया वसूली एवं वादग्रस्त परिसर का खाली कब्जा जरिये इजराय प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

अपीलार्थी की ओर से प्रस्तुत अंडरटेकिंग व उसमें अंकित तथ्य इस निर्णय का भाग समझे जावेंगे।

उपरोक्त निर्णय की रोशनी में प्रार्थना पत्र संख्या 38816/2017 तथा 38815/2017 भी निस्तारित समझे जावें।