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Judgment
अधीनस्थ न्यायालय, अपर जिला न्यायाधीश, क्रम-19, सांगानेर, जयपुर महानगर द्वारा दीवानी मूल वाद संख्या-486/2013 में पारित आदेश दिनांकित 19.09.2014, जिसके तहत प्रत्यर्थी-प्रतिवादी संख्या-2 से 10 की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत आदेश 7 नियम 11 सिविल प्रक्रिया संहिता स्वीकार किया जाकर, अपीलार्थी-वादी का वाद निरस्त किया गया, के विरूद्ध अपीलार्थी-वादी की ओर से यह अपील प्रस्तुत की गई है।
सुना गया। योग्य अधिवक्ता अपीलार्थी-वादी का कथन रहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने मात्र विक्रय पत्र में अंकित खसरा नंबर 574 से राजस्व रेकर्ड का मिलान कर आदेश पारित किया है। उनका कथन रहा कि वादग्रस्त सम्पत्ति, जिसके क्रम में विक्रय पत्र को शून्य घोषित किये जाने की प्रार्थना की गई है, वह खसरा नंबर 574 का भाग है या नहीं, इस बिन्दु को तय करने के पश्चात ही यह तय किया जा सकता है कि मामले में किस न्यायालय को सुनवाई का क्षेत्राधिकार है। अतः अपील स्वीकार कर इस बिन्दु पर पुनः सुनवाई हेतु प्रकरण अधीनस्थ न्यायालय को प्रतिप्रेषित किया जाए।
योग्य अधिवक्ता प्रत्यर्थी का कथन रहा कि अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत वादपत्र में विक्रय पत्र को चुनौती दी गई है एवं विक्रय पत्र में खसरा नंबर 574 लिखा गया है। अतः अधीनस्थ न्यायालय का आदेश समुचित होना बताकर प्रस्तुत अपील खारिज किये जाने की प्रार्थना की गई। समस्त तथ्यों पर विचार किया गया। अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आक्षेपित आदेश के अवलोकन से प्रकट होता है कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा खसरा नंबर 574 से मिलान कर आदेश पारित किया जाना प्रकट होता है, लेकिन वादग्रस्त सम्पत्ति, जिसमें खसरा नंबर 574 लिखा गया है, वह वादी की सम्पत्ति के अंदर स्थित खसरा नंबर 574 का ही भाग है अथवा अन्य कोई खसरा नंबर का भाग है। इस क्रम में दोनों पक्षां की साक्ष्य लेखबद्ध कर निष्कर्ष दिया जाना उचित है। इस हेतु प्रकरण अधीनस्थ न्यायालय को प्रतिप्रेषित किया जाना उचित है।
परिणामतः अपीलार्थी-वादी की ओर से प्रस्तुत यह अपील आंशिक रूप से पुनः सुनवाई की प्रार्थना की हद तक स्वीकार की जाती है और अधीनस्थ न्यायालय का आदेश दिनांकित 19.09. 2014 अपास्त किया जाता है एवं अधीनस्थ न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि प्रतिवादी की ओर से प्रार्थना पत्र अंतर्गत आदेश 7 नियम 11 सिविल प्रक्रिया संहिता में उठाये गये ऐतराज के बाबत जवाबदावा में यदि कोई अभिवचन लिया गया है तो उसके अनुसार विवाधक विरचित करे एवं उस पर साक्ष्य लेखबद्ध करते हुए दोनों पक्षों को सुनकर अपने पूर्व आदेश एवं इस आदेश से प्रभावित हुए बिना न्यायोचित आदेश पारित करे।
दोनों पक्ष अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष दिनांक 16.01. 2019 को उपस्थित रहें। कार्यालय को निर्देशित किया जाता है कि अधीनस्थ न्यायालय का अभिलेख निर्णय की प्रति के साथ अविलम्ब प्रेषित किया जाए।
यह निर्णय आज दिनांक 06.12.2018 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 348 (i) के तहत भारत सरकार की अधिसूचना राजपत्र संख्या-1, दिनांक 02 जनवरी, 1999 एवं राजस्थान राजपत्र दिनांकित 10.03.1971 के तहत हिन्दी भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत किये जाने के परिणामस्वरूप हिन्दी भाषा में लिखाया गया।
