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Judgment
न्यायालय द्वारा :
अधीनस्थ न्यायालय, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, भीनमाल, जिला जालोर द्वारा फौजदारी प्रकरण संख्या-665/2011 में पारित आदेश दिनांक 8.2.2019, जिसके तहत याची के द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 239 दण्ड प्रक्रिया संहिता खारिज किया गया, के विरूद्ध प्रस्तुत दाण्डिक निगरानी अधीनस्थ निगरानी न्यायालय अपर सेशन न्यायाधीश, भीनमाल द्वारा पारित आदेश दिनांक 17.9.2019 से खारिज की गई है, से व्यथित होकर याची-अभियुक्त की ओर से फौजदारी विविध याचिका धारा 482 दण्ड प्रक्रिया संहिता में प्रस्तुत की गई है।
सुना गया। योग्य अधिवक्ता याची ने प्रकट किया कि याची की ओर से अधीनस्थ न्यायालय में प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 239 दण्ड प्रक्रिया
संहिता प्रस्तुत कर याची को आरोपित अपराध से दोषमुक्त किये जाने की प्रार्थना की गयी थी जिसे अधीनस्थ न्यायालय द्वारा खारिज किया गया। जिसके विरूद्ध प्रस्तुत दांडिक निगरानी अधीनस्थ निगरानी न्यायालय द्वारा गुणावगुण पर निस्तारित नहीं कर निगरानी को मियाद के बिन्दु पर खारिज किया गया है। उनका यह भी कथन रहा कि अधीनस्थ निगरानी न्यायालय को अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आदेश की वैधता को भी देखना आवश्यक था। अधीनस्थ निगरानी न्यायालय ने क्षेत्राधिकार विहीन होकर आक्षेपित आदेश पारित किया है। अतः इस याचिका को स्वीकार किया जावे।
उन्होंने अपने तर्कों के समर्थन में वर्तमान याची से संबंधित अन्य दो प्रकरण दांडिक विविध याचिका संख्या 51/2020 व 55/2020 में समकक्ष पीठ द्वारा पारित आदेश की प्रतियां प्रस्तुत की, जिन्हें अभिलेख पर लिया जाता है।
योग्य अधिवक्ता याची ने अयाची संख्या-2 की तामील से अभिमुक्ति प्रदान करने का निवेदन किया। अतः योग्य अधिवक्ता याची के
जोखिम व दायित्व के अधीन उक्त अयाची की तामील से अभिमुक्ति प्रदान की जाती है।
विचार किया गया। स्वीकृत रूप से अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा याची की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 239 दण्ड प्रक्रिया संहिता बाबत याची को आरोपित अपराध से दोषमुक्त किये जाने खारिज किये जाने के पश्चात याची की ओर से उक्त आदेश के विरूद्ध निगरानी प्रस्तुत की गयी है। इस न्यायालय के मत में, अधीनस्थ निगरानी न्यायालय को दोनों पक्षों को सुनकर अधीनस्थ न्यायालय के द्वारा पारित आदेश की वैधता को ध्यान में रखते हुए आदेश पारित किया जाना चाहिए था। अधीनस्थ निगरानी न्यायालय द्वारा पारित आदेश निगरानी पर गुणावगुण पर सुनवाई के पूर्व का आदेश है तथा मात्र मियाद के बिन्दु को ध्यान में रखते हुए आदेश पारित किया गया है।
अतः यह दांडिक विविध याचिका स्वीकार की जाकर अधीनस्थ निगरानी न्यायालय द्वारा पारित आक्षेपित आदेश दिनांक 17.9.2019 अपास्त किया जाता है तथा अधीनस्थ निगरानी न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि वे निगरानी याचिका पर दोनों पक्षों को सुनकर गुणावगुण पर आदेश पारित करे।
प्रकरण काफी पुराना है, अतः अधीनस्थ निगरानी न्यायालय को निर्देशित किया जाता है कि प्रकरण का शीघ्रातिशीघ्र निस्तारण करने का प्रयास करे।
