High CourtsSingle Bench(2020) 02 RAJ CK 0156

Sunil Kumar And Ors vs State Of Rajasthan And Ors

Rajasthan High Court · Decided on 27 February 2020

HON’BLE JUDGES
Mahendra Maheshwari, J
RESULT
Allowed
CASE NUMBER
Criminal Misc(Pet.) No. 118 Of 2020

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Judgment

6 paragraphs · 417 words

प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 81/2016 पुलिसथाना कुचामन सिटी को निरस्त/अपास्त कराने हेतु याचीगण की ओर से धारा 482 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत यह फौजदारी विविध याचिका प्रस्तुत की गई है।

याचीगण के अधिवक्ता का कथन रहा कि वे इस याचिका के गुणावगुण पर बल नहीं देते हैं परन्तु उनका कथन रहा कि पूर्व में अनुसंधान पूर्ण हो चुका था जिसमें संबंधित अनुसंधान अधिकारी द्वारा एफ.आर. दी जा चुकी थी। तत्पश्चात्, अनुसंधान अधिकारी बदलने के परिणामस्वरूप याचीगण के विरूद्ध एकतरफा साक्ष्य एकत्रित की गई है और नतीजा न्यायालय में पेश किये जाने की सम्भावना है। उनका यह भी कथन रहा कि याचीगण अनुसंधान अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष जरिये प्रत्यावेदन/दस्तावेज एवं मौखिक साक्ष्य रखना चाहते हैं। उनका कथन है कि संबंधित अनुसंधान अधिकारी के विरूद्ध याचीगण द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है ऐसी सूरत में उच्चाधिकारी (Superior Authority) से मत प्राप्त करने के पश्चात् ही नतीजा अनुसंधान न्यायालय में पेश किया जाये तथा याचीगण की पुलिसथानाधिकारी के समक्ष उपस्थिति तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाये।

योग्य लोक अभियोजक द्वारा मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसे रेकर्ड पर लिया जाता है। राज्य सरकार की ओर से योग्य लोक अभियोजक नोटिस स्वीकार करते हैं। उन्होंने विधिनुसार आदेश पारित किये जाने का निवेदन किया।

सुना गया। चूंकि याचीगण ने याचिका में गुणावगुण पर आदेश पारित नहीं किये जाने प्रार्थना करते हुए मात्र उपरोक्तानुसार अनुसंधान अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत हो अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने की प्रार्थना की गई है इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए अयाची संख्या 5 को नोटिस दिये जाने की मौखिक रूप से छूट की प्रार्थना स्वीकार की जाती है।

विचार किया गया। मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह विविध याचिका इस निर्देश के साथ निस्तारित की जाती है कि याचीगण तारीख 24.03.2020 को अथवा उससे पूर्व संबंधित पुलिसथाना अधिकारी/अनुसंधान अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अनुसंधान अधिकारी द्वारा चाहे गये प्रश्नों का उत्तर देंगे एवं यदि याचीगण लिखत में प्रत्यावेदन प्रस्तुत करना चाहते हैं तो उस स्थिति में लिखित में प्रत्यावेदन प्रस्तुत होने पर अनुसंधान अधिकारी उक्त प्रत्यावेदन रेकर्ड पर प्राप्त कर प्रत्यावेदन की रोशनी में निष्पक्ष निष्कर्ष के क्रम में कार्यवाही करेंगे एवं संबंधित न्यायालय में अनुसंधान परिणाम प्रस्तुत किये जाने से पूर्व कानून की परिधि में अपने उच्चाधिकारी (Superior Authority) से मत प्राप्त किया जायेगा। याचीगण को तारीख 24.03.2020 तक गिरफ्तार नहीं किया जायेगा। तत्पश्चात अनुसंधान के बाद यदि अनुसंधान अधिकारी याचीगण की अपराध में लिप्तता पाये तो नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र रहेंगे।

तदनुसार, स्थगन याचिका भी निस्तारित की जाती है।