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Judgment
अधीनस्थ विचारण न्यायालय, विशिष्ठ महानगर मजिस्टेट (एन.आई.एक्ट केसेज) क्रम संख्या-19, जयपुर महानगर द्वारा फौजदारी प्रकरण संख्या 423/2015 में पारित निर्णय दिनांकित 19.12.2017, जिसके द्वारा अयाची-परिवादी की ओर से प्रस्तुत परिवाद पर याची-अभियुक्त को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम में दोषी करार देते हुए आठ माह के साधारण कारावास तथा 16,00,000/- रूपये अर्थदण्ड, अदम अदायगी अर्थदण्ड याची/अभियुक्त को दो माह का साधारण कारावास और भुगतने हेतु आदेश दिया गया है, के विरूद्ध प्रस्तुत दाण्डिक अपील संख्या 05/2018 अधीनस्थ अपीलीय न्यायालय, अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-10, जयपुर महानगर द्वारा पारित निर्णय दिना ंक 30.09.2019 जिसके द्वारा याची-अभियुक्त द्वारा प्रस्तुत अपील अस्वीकार करते हुए विद्वान विचारण न्यायालय द्वारा पारित आलोच्य निर्णय एवं दण्डादेश दिनांकित 19.12.2017 को यथावत रखा है, से व्यथित होकर याची-अभियुक्त की ओर से यह पुनरीक्षण याचिका प्रस्तुत की गयी है।
विद्वान अधिवक्ता याची-अभियुक्त का कथन रहा है कि दोनों पक्षों के मध्य राजीनामा हो चुका है तथा अयाची-परिवादी को याची-अभियुक्त द्वारा राजीनामा के अनुसार राशि अदा कर दी गई है एवं इस क्रम में लिखित में पत्रावली पर प्रस्तुत है। उक्त राजीनामा को रिकार्ड पर लेते हुए राजीनामा के आधार पर प्रकरण का निस्तारण किये जाने की प्रार्थना की गई।
याची-अभियुक्त श्री अजय यादव तथा अयाची-परिवादिया श्रीमती साधना यादव व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष उपस्थित हैं, जिनकी तस्दीक हेतु इस न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को प्रेषित किया गया जिन्होंने पक्षकारों के मध्य हुए राजीनामा को सत्यापित करते हुए पत्रावली पुनः इस न्यायालय को प्रेषित की।
विचार किया गया। दोनों पक्षों के मध्य राजीनामा होने के क्रम में लिखित राजीनामा प्रस्तुत किया गया है एवं अधिवक्ता परिवादी ने भी राजीनामा होना स्वीकार किया है। तदनुसार प्रकरण के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए धारा 147 परक्राम्य लिखत अधिनियम एवं धारा 320 दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत राजीनामा के आधार पर प्रकरण का निस्तारण किया जाना उचित प्रतीत होता है।
परिणामतः याची-अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत यह पुनरीक्षण याचिका राजीनामा के आधार पर स्वीकार की जाती है एवं अधीनस्थ विचारण न्यायालय, विशिष्ठ महानगर मजिस्टेट (एनआई.एक्ट केसेज) क्रम संख्या-19, जयपुर महानगर द्वारा फौजदारी प्रकरण संख्या 423/2015 में पारित निर्णय दिना ंकित 19.12.2017 एवं दाण्डिक अपील संख्या 05/2018 में अधीनस्थ अपीलीय न्यायालय, अपर सेशन न्यायाधीश संख्या-10, जयपुर महानगर द्वारा पारित निर्णय दिनांक 30.09.2019 को अपास्त किया जाता है तथा याची-अभियुक्त को धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के आरोप से बरूए राजीनामा दोषमुक्त किया जाता है।
