High CourtsSingle Bench(2019) 09 RAJ CK 0244

Pooja Prabhakar vs State Of Rajasthan And Ors

Rajasthan High Court · Decided on 17 September 2019

HON’BLE JUDGES
Mahendra Maheshwari, J
RESULT
Disposed Of
CASE NUMBER
Criminal Miscellaneous Stay Application No. 5699 Of 2019 In Criminal Revision Petition No. 1924 Of 2019

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Judgment

7 paragraphs · 522 words

प्रार्थीया-याची की ओर से प्रस्तुत स्थगन प्रार्थना पत्र पर दोनों पक्षों को सुना गया। अधीनस्थ विचारण न्यायालय एवं अधीनस्थ अपीलीय न्यायालय के आलोच्य निर्णय एवं उपलब्ध कानूनी व तथ्यात्मक स्थिति पर विचार किया गया।

बहस सुनी गई। योग्य अधिवक्ता याची का कथन रहा कि याची वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में है। योग्य अधिवक्ता याची का यह भी कथन रहा कि अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा अधिरोपित प्रतिकर/अर्थदण्ड की चालीस प्रतिशत राशि (पूर्व में जमा/अदा की गई राशि समायोजित करते हुए) प्रार्थी-याची स्वेच्छा से अधीनस्थ विचारण न्यायालय में जमा कराने को तैयार है। अतः अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा दी गयी दोषसिद्धी का क्रियान्वयन स्थगित कर याची को जमानत पर रिहा किये जाने के आदेश प्रदान किये जावें।

योग्य लोक अभियोजक ने तथा अधिवक्ता परिवादी ने उक्त तर्कों का विरोध किया, किन्तु योग्य अधिवक्ता परिवादी भी प्रार्थी के वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में होने का खण्डन नहीं करते हैं।

समस्त तथ्यों पर विचार किया गया। बहस के दौरान याची के योग्य अधिवक्ता द्वारा चालीस प्रतिशत राशि स्वेच्छा से अधीनस्थ न्यायालय में जमा कराने के बाबत जो सहमति प्रदान की गई है, उसे एवं याची के अभिरक्षा में होने बाबत् जो कथन किया गया है, उसको ध्यान में रखते हुए, प्रकरण के गुणावगुण पर कोइ राय व्यक्त किये बिना, अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा अधिरोपित प्रतिकर/अर्थदण्ड की चालीस प्रतिशत राशि अधीनस्थ विचारण न्यायालय में जमा कराने की शर्त पर अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित दण्डादेश का क्रियान्वयन स्थगित किया जाना उचित प्रतीत होता है।

परिणामतः विद्वान अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा अधिरोपित प्रतिकर/अर्थदण्ड की चालीस प्रतिशत राशि (पूर्व में जमा/अदा की गई राशि समायोजित करते हुए) याची द्वारा अधीनस्थ विचारण न्यायालय में जमा करावे एवं यदि प्रार्थी-याची इस न्यायालय में दिनांक 17.10.2019 को एवं तत्पश्चात जब भी उसे आदेशित किया जावे, अपनी उपस्थिति हेतु पचास हजार रूपये का बंधपत्र एवं पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये की दो जमानतें विद्वान विचारण न्यायालय के संतोषप्रद प्रस्तुत कर तस्दीक करवा दे एवं आदेशित राशि जमा करवा दे तो उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाए एवं विद्वान विशिष्ठ महानगर मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट कैसेज), क्रम-15, जयपुर महानगर द्वारा परिवाद प्रकरण संख्या-395/2015 (3943/2008) में पारित आक्षेपित निर्णय दिना ंकित 19.11.2016 एवं अधीनस्थ अपीलीय न्यायालय, अपर सेशन न्यायाधीश, क्रम-12, जयपुर महानगर द्वारा फौजदारी अपील संख्या-51/2016 में पारित निर्णय 20.08.2019 के तहत अधीनस्थ विचारण न्यायालय के निर्णय की पुष्टि कर दण्डादेश  (sentence) को यथावत रखने के आदेश का क्रियान्वयन इस पुनरीक्षण याचिका के अन्तिम निर्णय तक स्थगित रखा जाता है।

इस आदेश के तहत याची द्वारा आदेशित राशि जमा कराने के पश्चात परिवादी की ओर से अधीनस्थ विचारण न्यायालय में इस आदेश की रोशनी में राशि प्राप्ति का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर, अधीनस्थ विचारण न्यायालय द्वारा जमाशुदा राशि परिवादी का इन तथ्यों की अण्डरटेकिंग प्रस्तुत करने पर अदा कर दी जाए कि यदि याची इस पुनरीक्षण याचिका में सफल होता है तो उस स्थिति में परिवादी द्वारा इस आदेश के अधीन प्राप्त की गई राशि पुनः याची को 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ पुनरीक्षण याचिका के निर्णय के एक माह की अवधि में लौटाने के लिये बाध्य व तैयार रहेगा अन्यथा परिवादी इस न्यायालय के आदेश की अवहेलना के लिये दायी होगा।

उपरोक्त निर्देश के साथ यह स्थगन प्रार्थना पत्र उपरोक्तानुसार निस्तारित किया जाता है।