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Judgment
अधीनस्थ न्यायालय अतिरिक्त सेशन न्यायालय, महिला उत्पीडन प्रकरण संख्या-1, कोटा द्वारा सेशन केस नम्बर 111/2018 (सरकार बनाम अमित विश्वास व अन्य) में पारित आदेश दिनांक 29.01.2019 जिसके द्वारा कि अधीनस्थ न्यायालय ने याची/अभियुक्त के विरूद्ध धारा 307, 324, 341, 323/34 भा.द ं.सं. के अन्तर्गत आरोप विरचित किये जाने का आदेश पारित किया है, से व्यथित होकर यह निगरानी याचिका इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की है।
बहस सुनी गई।
योग्य अधिवक्ता याची/अभियुक्त का कथन रहा है कि आहत मनीष तथा गोविन्द के शरीर पर ऐसी कोई चोट नहीं है जो उनके जीवन के लिए प्राणघातक हो। चिकित्सक की राय के अनुसार आहत गोविन्द के शरीर पर चोट संख्या-1 भी साधारण प्रकृति की बतायी गयी है। उनका कथन रहा है कि मूल रूप से चोट मारने के आरोपी/अभियुक्त कपिल उर्फ तन्नू के विरूद्ध भी अधीनस्थ न्यायालय ने आलोच्य आदेश के द्वारा उपरोक्त धाराओं में प्रथमदृष्टया आरोप बनना पाये जाने का आदेश पारित किया, जिसे अभियुक्त कपिल उर्फ तन्नू ने इस न्यायालय के समक्ष चुनौती दी। जिस पर इस न्यायालय ने एकलपीठ दाण्डिक निगरानी याचिका संख्या 721/2019 (कपिल उर्फ तन्नू बनाम स्टेट) में दिनांक 10.04.2019 को आदेश पारित करते हुए धारा 307 भा.दं.सं. की हद तक आलोच्य आदेश को अपास्त करते हुए उसे धारा 307 भा.दं.सं. के आरोप से उन्मोचित किया है। उनका कथन रहा है कि याची/अभियुक्त का प्रकरण कपिल उर्फ तन्नू से किसी प्रकार से भिन्न नहीं है। उनका यह भी कथन रहा है कि किन्तु अधीनस्थ न्यायालय ने आहत की चोटों का अवलोकन किये बिना ही आलोच्य आदेश पारित किया है। अतः याची/अभियुक्त की ओर से प्रस्तुत निगरानी याचिका स्वीकार किये जाने का निवेदन किया।
विद्वान लोक अभियोजक ने इसका विरोध किया।
दोनों पक्षों के तर्कों एवं मामले के समस्त तथ्यों पर विचार किया गया।
वर्तमान प्रकरण में मूल रूप से चोट मारने का आरोप अन्य अभियुक्त कपिल उर्फ तन्नू पर बताया गया था तथा याची/अभियुक्त का मात्र उसके साथ होना अवश्य बताया गया है तथा अन्य अभियुक्त कपिल उर्फ तन्नू को इस न्यायालय के आदेश दिनांक 10.04.2019 के तहत धारा 307 भा.दं.सं. के आरोप से उन्मोचित किया जा चुका है।
अतः उपरोक्त तथ्यात्मक स्थिति, अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित आदेश के साथ साथ इस न्यायालय द्वारा एकलपीठ दाण्डिक निगरानी याचिका संख्या 721/2019 (कपिल उर्फ तन्नू बनाम स्टेट) में पारित आदेश दिनांक 10.04.2019, जिसमें कि अभियुक्त कपिल उर्फ तन्नू के विरूद्ध धारा 307 भा.दं.सं. का आरोप नहीं मानते हुए धारा 307 भा.दं.सं. के आरोप से उन्मोचित किया था तथा बाकी अपराध धारा 324, 341, 323/34 भा.दं.सं. के तहत आरोप आदेश को यथावत रखा था। अतः आहत गोविन्द के शरीर पर आयी चोटों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान याची के क्रम में धारा 307 भारतीय दण्ड संहिता की हद तक आक्षेपित आदेश अपास्त किये जाने योग्य है।
परिणामतः, याची की ओर से प्रस्तुत यह निगरानी याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है एवं अधीनस्थ न्यायालय का आदेश दिनांकित 29.01.2019 याची के क्रम में धारा 307 भारतीय दण्ड संहिता की हद तक अपास्त किया जाकर, याची को धारा 307 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप से उन्मोचित किया जाता है। धारा 324, 341, 323/34 भारतीय दण्ड संहिता के आरोप के क्रम में आक्षेपित आदेश यथावत रखा जाता है।
उपरोक्तानुसार यह निगरानी याचिका निस्तारित की जाती है एवं तदनुसार स्थगन प्रार्थना पत्र भी निस्तारित किया जाता है।
