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Judgment
प्रार्थीगण की ओर से धारा 438 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत पुलिस थाना, बौंली, जिला-सवाई माधोपुर में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या-52/2019 में अग्रिम जमानत का लाभ देने के लिये यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया है। अधीनस्थ न्यायालय द्वारा प्रार्थीगण का अग्रिम जमानत आवेदन दिनांक 27.08.2019 को खारिज किया गया है।
योग्य अधिवक्ता प्रार्थीगण की ओर से निवेदन किया गया कि वे प्रार्थी/अभियुक्त संख्या-5 ब्रह्मसिंह तथा प्रार्थी/अभियुक्त संख्या-6 केदार के जमानत प्रार्थना पत्र पर बल नहीं देते हैं।
प्रार्थीगण संख्या 1लगायत 4 के क्रम में बहस सुनी गई।
योग्य अधिवक्ता प्रार्थीगण का तर्क रहा कि इसी घटना के बाबत् पूर्व में भी एक प्रथम सूचना रिपोर्ट फेलीराम मीना द्वारा दर्ज करायी गयी एवं उस क्रम में चारों प्रार्थीगण की जमानत समकक्ष पीठ द्वारा हो चुकी है। तत्पश्चात पुनः प्रकाश चन्द माली द्वारा उसी घटना के बाबत् प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है जो कि पोषणीय नहीं है। उनका कथन रहा है कि फेलीराम मीना द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराते समय स्वयं प्रकाश चन्द माली मौके पर मौजूद था। अतः अग्रिम जमानत का लाभ दिये जाने की प्रार्थना की गई।
योग्य लोक अभियोजक ने अग्रिम जमानत आवेदन का विरोध किया। समस्त तर्कों पर विचार किया गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
प्रकरण की तथ्यात्मक स्थिति एवं संबंधित आरोप के क्रम में पूर्व में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराते समय फेलीराम मीना के साथ प्रकाश चन्द माली की उपस्थिति भी होने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए, मामले के गुणावगुण पर कोई टिप्पणी किये बिना, प्रार्थीगण संख्या 1लगायत 4 की ओर से प्रस्तुत यह अग्रिम जमानत आवेदन स्वीकार किये जाने योग्य है।
परिणामतः प्रार्थीगण राजेश, पुखराज, लोकेन्द्र सिंह उर्फ भुरसा तथा मनराज की ओर से प्रस्तुत यह अग्रिम जमानत आवेदन स्वीकार किया जाता है तथा अनुसंधान अधिकारी/थानाधिकारी, पुलिस थाना, बौंली, जिला-सवाई माधोपुर को निर्देश दिये जाते हैं कि वह उनके यहॉं पंजीबद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या-52/2019 में प्रार्थीगण को गिरफ्तार किये जाने की सूरत में यदि प्रत्येक प्रार्थी उनके संतोषप्रद पचास हजार रूपये का व्यक्तिगत बंधपत्र एवं पच्चीस-पच्चीस हजार रूपये राशि की दो जमानतें प्रस्तुत कर तस्दीक करवा दे तो उन्हें निम्न शर्तां के अधीन जमानत पर आजाद कर दिया जाए :
कि प्रार्थीगण पुलिस अधिकारी द्वारा पूछे जाने वाले परिप्रश्नों का उत्तर देने के लिये जैसे और जब अपेक्षित हो, उपलब्ध होंगे
कि प्रार्थीगण इस मामले के तथ्यों से अवगत किसी व्यक्ति को न्यायालय या किसी पुलिस अधिकारी के समक्ष ऐसे तथ्यों को प्रकट न करने के लिये मनाने के वास्ते प्रत्यक्षः अथवा परोक्ष रूप से उसे कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देंगे,
कि प्रार्थीगण बिना न्यायालय की पूर्व अनुमति के भारत नहीं छोडेंगे।
अन्य प्रार्थी/अभियुक्त ब्रह्म सिंह उर्फ डोड्या तथा केदार के क्रम में अधिवक्ता याची द्वारा दिये गये तर्क एवं प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्र बल नहीं दिये जाने के आधार पर खारिज किया जाता है।
