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Judgment
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अपीलार्थीगण/क्लेमेंटस् द्वारा यह दोनों सिविल विविध अपीलें न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, किषनगढ़बास जिला अलवर ;जिसे आगे 'अधीनस्थ अधिकरण' से सम्बोधित किया जावेगाद्ध द्वारा क्लेम याचिका संख्या 41/2008 व 42/2008 में पारित निर्णय व पंचाट दिनांक 23.08.2012 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई हैं, जिसके द्वारा 'अधीनस्थ अधिकरण' ने अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स द्वारा प्रस्तुत क्लेम याचिकाऐं अन्तर्गत धारा 166, मोटर वाहन अधिनियम,1988 आंषिक रूप से स्वीकार करते हुए उन्हें प्रत्यर्थीगण/अप्रार्थीगण से संयुक्त व पृथक-पृथक रूप से क्रमषः 3,000/-रू. व 36,000/-रू. क्षतिपूर्ति राषि व उस पर 6 प्रतिषत वार्षिक दर से ब्याज दिलाने का पंचाट पारित किया था।
यह दोनों अपीलें एक ही दुर्घटना से सम्बन्धित होने से व एक ही निर्णय व पंचाट दिनांक-23.8.2012 के विरूद्ध प्रस्तुत की गई होने से दोनों अपीलों को इस एक ही निर्णय से निर्णीत किया किया रहा है।
अपीलार्थीगण /क्लेमेंटस् के अनुसार दिनांक 31.12.2007 को सायंकाल करीब 6.30 बजे चामरोदा बस स्टैण्ड, किषनगढ़बास पर ट्रक संख्या-RJ 14. GB.3111 के चालक द्वारा उक्त ट्रक को असावधानी व लापरवाही से बीच सड़क पर बिना इण्डीकेटर जलाये खड़ा करने से मोटरसाईकिल, जिसे घीसाराम चला रहा था व जिसके पीछे नवीन बैठा था, उक्त ट्रक के पीछे टकरा गई जिससे आयी चोटों से घीसाराम की मृत्यु हो गई व नवीन घायल हो गया। दुर्घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट सम्बन्धित थाने में दर्ज कराई गई जिसमें बाद अनुसंधान ट्रक चालक के विरूद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स ने उक्त दुर्घटना में घीसाराम की मृत्यु से उन्हें हुई क्षति के लिए प्रतिकर दिलाने हेतु क्लेम याचिका संख्या-42/2008 प्रस्तुत की व नाबालिग नवीन के उक्त दुर्घटना में आई चोटों के लिए के प्रतिकर दिलाये जाने हेतु उसकी ओर से जरिए प्राकृतिक संरक्षक पृथक से क्लेम याचिका संख्या-41/2008 प्रस्तुत की गई। अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स ने क्लेम याचिकाओं में वर्णित प्रतिकर राषि दिलाये जाने की मॉंग की ।
प्रत्यर्थीगण/अप्रार्थीगण संख्या- 1, 2 व 3 द्वारा प्रस्तुत जवाब में मुख्य रूप से यह कहा गया कि कथित दुर्घटना ट्रक संख्या-RJ 14-GB-3111 के चालक अप्रार्थी संख्या 1 की गलती व लापरवाही से नहीं वरन मोटरसाईकिल चालक स्वयं की गलती व लापरवाही से मोटरसाईकिल को चलाने से हुयी थी।
प्रत्यर्थी/अप्रार्थी संख्या-4 द्वारा प्रस्तुत जवाब में उसे क्लेम याचिकाओं में अनावष्यक रूप से पक्षकार बनाया जाना कहा गया चूंकि वह वित्तदाता है जिसका किसी प्रकार का कोई उत्तरदायित्व क्षतिपूर्ति हेतु नहीं है।
प्रत्यर्थी/अप्रार्थी संख्या-5 बीमा कम्पनी द्वारा जवाब में दुर्घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट देरी से दर्ज कराया जाना, जिसकी कोई सूचना बीमा कम्पनी को नहीं दिया जाना कहा गया। साथ ही मोटरसाईकिल चालक के पास मोटरसाईकिल चलाने का कोई वैध व प्रभावी ड्राईविंग लाईसेंस नहीं होना व कथित दुर्घटना में प्रष्नगत ट्रक के चालक अप्रार्थी संख्या-1 उमर मोहम्मद की कोई गलती व लापरवाही नहीं होना वरन् दुर्घटना स्वयं मृतक घीसाराम द्वारा मोटरसाईकिल को गफलत व लापरवाही से चलाने से घटित होना कहा गया।
'अधीनस्थ अधिकरण' ने प्रकरण में आवष्यक विवाद्यक विरचित किए।
अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स ने समर्थन में मौखिक व प्रलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत की, जबकि प्रत्यर्थीगण/अप्रार्थीगण ने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की। तत्पष्चात् 'अधीनस्थ अधिकरण' ने अपने निर्णय व पंचाट दिनांक 06.03.2009 द्वारा क्लेम याचिका संख्या-41/2008 में 3000/-रू. व उस पर ब्याज दिलाये जाने व क्लेम याचिका संख्या 42/2008 में 36000/-रू. व ब्याज दिलाये जाने का पंचाट पारित किया। जिससे व्यथित होकर अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स ने पृथक-पृथक अपीलें प्रस्तुत की, जो दिनांक-26.07.2011 को आंषिक रूप से स्वीकार की जाकर पूर्व निर्णय व पंचाट दिनांक-06.03.2009 विवाद्यक संख्या-1 के संबंध में निकाले गये निष्कर्षों की सीमा तक अपास्त करते हुए प्रकरण 'अधीनस्थ अधिकरण' को इस निर्देष के साथ कि 'अधीनस्थ अधिकरण' सोहन लाल व अन्य बनाम् बालस्वरूप बाल भाटनागर वगैरह, 1987 ए.सी.जे. 113 विनिर्णय में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए मार्गदर्षन के प्रकाष में पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए विवाद्यक संख्या-1 के सम्बन्ध में प्रकरण पुनः नये सिरे से निस्तारित करेगा, प्रतिप्रेषित किया गया।
तत्पष्चात् 'अधीनस्थ अधिकरण' ने विवाद्यक संख्या-1 का निर्णय दिनांक 26.07.2011 में दिये गए निर्देशों के अनुसार नये सिरे से करते हुए, पूर्व पंचाट में हस्तक्षेप किया जाना उचित नहीं पाते हुए, उसे यथावत् रखते हुए, दोनों क्लेम याचिकायें इस अपील में आक्षेपित निर्णय व पंचाट दिनांक 23.08.2012 द्वारा निर्णीत की, जिसके विरूद्ध वर्तमान दोनों अपीलें दायर की गई हैं ।
योग्य अधिवक्ता अपीलार्थीगण श्री संदीप माथुर का तर्क है कि 'अधीनस्थ अधिकरण' ने प्रकरण को प्रति प्रेषित करने के बाद बिना किसी न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए पूर्व में पारित निर्णय को ही दोहरा दिया है। उनका तर्क है कि 'अधीनस्थ अधिकरण' ने न्यायिक दृष्टांत सोहन लाल व अन्य बनाम् बाल स्वरूप बाल भटनागर वगैरह, 1987 एसीजे, पेज 113 को समझने में तात्विक भूल कारित की है। प्रकरण में स्वीकृत रूप से दुर्घटना दिनांक-31.12.2007 को सांय करीब 6.30 बजे की है और दिसम्बर माह में सांय 6.30 बजे ही अंधेरा हो जाता है, परन्तु इस महत्वपूर्ण तथ्य पर कोई विचार किए बिना 'अधीनस्थ अधिकरण' ने यह अभिलिखित करते हुए कि सोहनलाल वाले मामले में दुर्घटना का समय रात्रि 9.00 बजे का था जबकि वर्तमान प्रकरण में दुर्घटना का समय सांय 6.30 बजे है, उक्त न्यायिक दृष्टांत को इस प्रकरण में लागू नहीं होना मानने में तात्विक व सारवान भूल कारित की है जबकि यह न्यायिक दृष्टांत इस प्रकरण में पूरी तरह लागू होता है। प्रतिकर राषि की मात्रा (Quantum) के सम्बन्ध में उनका तर्क है कि पूर्व में निर्णय दिनांक 26.07.2011, जिसके द्वारा प्रकरण प्रतिप्रेषित (Remand ) किया गया था, वह 'Remand' 'Limited Remand' नहीं होकर *Open remand' था इसलिए प्रतिकर राषि की मात्रा (Quantum) को भी इस अपील में अपीलार्थीगण द्वारा चुनौती दी जा सकती है। उनका प्रतिकर राषि की मात्रा (Quantum) के सम्बन्ध में तर्क है कि अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स को दिलाई गई प्रतिकर राषि कम होने से उसमें उचित वृद्धि किया जाना वांछित है, चूंकि मृतक की आय का निर्धारण सही नहीं किया गया है, साथ ही मृतक की भविष्य प्रत्याषा के मद में कोई राषि नहीं दिलाई गई है व अन्य मदों में भी राषि कम दिलाई गई है।
योग्य अधिवक्ता प्रत्यर्थी संख्या-5 बीमा कम्पनी श्री वीरेन्द्र अग्रवाल ने आक्षेपित निर्णय व पंचाट का समर्थन करते हुए कथन किया कि 'अधीनस्थ अधिकरण' द्वारा तनकी संख्या-1 पर पारित निर्णय में किसी प्रकार की कोई विधिक और तथ्यात्मक त्रुटि नहीं है अतः इस संबंध में उसमें कोई हस्तक्षेप किया जाना वांछित नहीं है। प्रतिकर राशि के सम्बन्ध में उनका तर्क है कि पूर्व निर्णय दिनांक-26.07.2011 द्वारा प्रकरण केवल तनकी संख्या-1 को ही नये सिरे से निस्तारित करने हेतु प्रतिप्रेषित किया गया था व अपीलार्थीगण/ क्लेमेंट्स को दिलाई गई प्रतिकर राशि के सम्बन्ध में पूर्व निर्णय व पंचाट दिनांक 06.03.2009 यथावत् रखा गया था, अतः अब अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स पूर्व में दिलाई गई प्रतिकर राषि को इन अपीलों में कोई चुनौती नहीं दे सकते। अन्त में उन्होंने दोनों अपीलें निरस्त करने की प्रार्थना की।
दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण को सुना गया व उनके द्वारा रखे गये तर्कों पर विचार किया गया व उपलब्ध सम्पूर्ण अभिलेख का ध्यान पूर्वक अवलोकन व परिषीलन किया गया।
अधीनस्थ अधिकरण' ने पूर्व निर्णय व पंचाट दिनांक-06.03.2009 की भॉंति इस अपील में आक्षेपित निर्णय व पंचाट दिनांक-23.08.2012 में भी प्रश्नगत दुर्घटना मोटरसाईकिल चालक मृतक घीसाराम व प्रष्नगत ट्रक के चालक की अंषदायी उपेक्षा से होना प्रमाणित माना है । इस संबंध में 'अधीनस्थ अधिकरण' द्वारा यह निष्कर्ष अभिलिखित किए गए हैं कि ट्रक संख्या आर.जे.14-जी.बी.3111 खड़ा था जिसकी इण्डीकेटर लाईट वगैरह तत्समय जली हुयी नहीं थी व सामने से आ रहे वाहनों की रोशनी के कारण मोटरसाईकिल मौके पर खड़े ट्रक के साथ टकरायी जिसके कारण दुर्घटना घटित हुयी । इस संबंध में मोटरसाईकिल चालक द्वारा भी सावधानी नहीं बरती गई और उसने साईड में खडे़ ट्रक में मोटरसाईकिल भिड़ा दी जिससे दुर्घटना कारित हुई । इससे दुर्घटना दोनों वाहन चालकों की गलती व लापरवाही से घटित होना प्रमाणित है । इस संबंध में 'अधीनस्थ अधिकरण' द्वारा यह निष्कर्ष भी अभिलिखित किया गया है कि पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से मोटरसाईकिल चालक ने सामने से आ रहे वाहनों की लाईटों की रोशनी उन पर पड़ने के बावजूद मोटरसाईकिल को धीमी गति व सावधानी के साथ नहीं चलाया, यह प्रमाणित होता है । यदि उसके द्वारा ऐसा किया जाता तो वह दुर्घटना टाल सकता था । 'अधीनस्थ अधिकरण' द्वारा अभिलिखित उक्त निष्कर्ष पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य व सामग्री पर आधारित हैं। उक्त निष्कर्षों को व प्रश्नगत दुर्घटना दोनों वाहनों के वाहन चालकों की गफलत व लापरवाही से घटित हुई थी, इस तथ्य को बहस के दौरान दोनों ही पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण द्वारा कोई चुनौती नहीं दी गई है । परन्तु 'अधीनस्थ अधिकरण' ने मोटरसाईकिल चालक की दुर्घटना में अधिक उपेक्षा व लापरवाही होना निर्णीत करते हुए उसकी 90 प्रतिशत उपेक्षा तथा ट्रक चालक की 10 प्रतिशत उपेक्षा होना निर्णीत किया है । यही बिन्दु मुख्यतः चुनौतीग्रस्त है।
इस स्थिति में यह निर्णीत किया जाना है कि क्या 'अधीनस्थ अधिकरण' ने दुर्घटना में 90 प्रतिशत उपेक्षा मोटरसाईकिल चालक की व 10 प्रतिशत उपेक्षा ट्रक चालक की होना माना है, वह विधिक व तथ्यात्मक रूप से सही है अथवा नहीं व इस संबंध में 'अधीनस्थ अधिकरण' ने अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य व सामग्री पर व न्यायिक दृष्टांत सोहन लाल व अन्य बनाम् बाल स्वरूप बाल भटनागर वगैरह (ऊपर उद्धरित) का सही मूल्यांकन व विश्लेषण किया है अथवा नहीं ?
पत्रावली पर आई साक्ष्य से यह पूरी तरह प्रमाणित है कि दुर्घटनास्थल पर प्रष्नगत ट्रक संख्या- आर.जे.14-जी.बी.-3111 बिना इण्डीकेटर लाईट आदि जलाये खड़ी अवस्था में था। निर्विवादित रूप से उक्त खड़े ट्रक के पीछे से मोटरसाईकिल जाकर टकराने से दुर्घटना कारित हुई है जिससे नवीन घायल हुआ व उसके पिता घासीराम की मृत्यु हो गई। घटना के चष्मदीद साक्षी दयाराम AW 2 व प्रताप सिंह AW 3 ने यह तथ्य प्रमाणित किया है सुसंगत समय सामने से आ रहे वाहनों का प्रकाष पड़ने के कारण ट्रक, जिसकी इण्डीकेटर लाईट आदि जली हुई नहीं थी व जो खड़ी अवस्था में था, मोटरसाईकिल चालक को नहीं दिखने से दुर्घटना कारित हुई।
यह स्वीकृत तथ्य है कि दुर्घटना दिनांक-31.12.2007 को सांय 6.30 बजे हुई थी। दिसम्बर माह सर्दी का माह होता है एवं उन दिनों सांय 6.30 बजे अंधेरा हो जाता है । ऐसी स्थिति में 'अधीनस्थ अधिकरण' का यह निष्कर्ष की सोहन लाल वाले मामले में दुर्घटना 9.00 बजे घटित होने से वह इस प्रकरण में लागू नहीं होता है, त्रुटि पूर्ण है। यह न्यायिक दृष्टांत पूरी तरह इस मामले में लागू होता है । इन तथ्यों व परिस्थितियों के प्रकाश में 'अधीनस्थ अधिकरण' द्वारा दुर्घटना में मोटरसाईकिल के चालक की उपेक्षा व लापरवाही 90 प्रतिषत मानना त्रुटिपूर्ण है व अभिलेख पर आई साक्ष्य व सामग्री व उक्त न्यायिक दृष्टांत के विपरीत है। बल्कि दुर्घटना में दोनों वाहनों के चालकों की बराबर-बराबर अर्थात 50-50 प्रतिषत उपेक्षा व लापरवाही होना अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य व सामग्री से व प्रकरण के तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए होना प्रमाणित है। अतः तनकी संख्या-1 इसी प्रकार निर्णीत की जाती है।
जहॉं तक प्रतिकर राषि का प्रष्न है, पूर्व में पारित निर्णय व पंचाट दिनांक-06.03.2009 तनकी संख्या-1 की सीमा तक ही निर्णय दिनांक- 26.07.2011 द्वारा अपास्त किया जाकर प्रकरण केवल तनकी संख्या-1 के सम्बन्ध में पुनः नये सिरे से निस्तारण हेतु 'अधीनस्थ अधिकरण' को प्रति प्रेषित किया गया था, पूर्व निर्णय व पंचाट दिनांक 06.03.2009 दिलायी गई प्रतिकर राषि के संबंध में यथावत् रखा गया था अर्थात् उसमें निर्णय दिनांक 26.07.2011 द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया था। अतः इस स्थिति म निर्धारित की गई प्रतिकर राशि को अपीलार्थीगण वर्तमान अपीलों में कोई चुनौती नहीं दे सकते। परिणामतः यह दोनों अपीलें आंषिक रूप से स्वीकार की जाती हैं ।
अपीलार्थीगण/क्लेमेंट्स दोनों क्लेम याचिकाओं में निर्धारित की गई प्रतिकर राषि क्रमषः 3,60,000/-रूपये व 30,000/-रूपये की 10 प्रतिषत राषि 36,000/-रूपये व 3000/-रूपये के स्थान पर अब 50 प्रतिषत राषि क्रमषः 1,80,000/-रूपये व 15,000/-रूपये क्षतिपूर्ति के रूप में प्राप्त करने के अधिकारी हैं। पंचाट दिनांक-23.08.2012 इसी अनुसार संषोधित किया जाता है। वृद्धि की गई क्षतिपूर्ति राषि पर अपीलार्थीगण क्लेम याचिकाऐं प्रस्तुत करने की दिनांक से राषि की अदायगी तक 6 वार्षिक दर से ब्याज भी प्राप्त करेंगे। बीमा कम्पनी को वृद्धि की गई राषि मय आदेषित ब्याज के एकाउण्ट पेयी बैंक ड्राफ्ट /पे ऑडर के जरिये तीन माह की अवधि में 'अधीनस्थ अधिकरण' में जमा कराने के आदेष दिए जाते हैं, जो अपीलार्थीगण नियमानुसार प्राप्त कर सकेंगे।
