High CourtsSingle Bench(2026) 10 CHH CK 1385

चोवाराम साहू vs टुमेश्वर कुमार & Anr.

Chhattisgarh High Court · Decided on 8 October 2026

HON’BLE JUDGES
संजय कुमार जायसवाल, J
RESULT
Dismissed
CASE NUMBER
विविध अपील (प्रतिकर) क्रमांक-1334/2023

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Judgment

11 paragraphs · 948 words

!! निर्णय पीठ पर पारित !!

1.

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, धमतरी, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़) द्वारा दावा प्रकरण क्रमांक 54/2021, “टुमेश्वर कुमार वगैरह विरुद्ध प्रहलाद साहू वगैरह” में पारित अधिनिर्णय दिनांक 11/04/2023 को चुनौती दी गई है, जिसे आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है।

2.

प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि टुमेश्वर कुमार (आहत) दिनांक 17/01/2020 को प्रातः लगभग 07:00-08:00 बजे अपने बच्चों के साथ था। उसी समय गोवर्धन साहू ट्रैक्टर क्रमांक सी.जी.-05-डब्ल्यू.-4467 (जिसे आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से संबोधित किया जा रहा है) को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया, जिसकी ठोकर लगने के फलस्वरूप टुमेश्वर कुमार के बाएं पैर के अंगूठे के बगल वाली अंगुली में गंभीर चोट आई। चिकित्सक द्वारा ऑपरेशन कर उक्त अंगुली को काटकर अलग कर दिया गया। अन्य हिस्सों में भी चोटें आईं। कालड़ा अस्पताल में उसका उपचार चला, जहां वह करीब 11 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा। दुर्घटना के बाबत थाना-अर्जुनी, धमतरी में अपराध क्रमांक-164/2020 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

3.

आहत टुमेश्वर कुमार द्वारा मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की मांग करते हुए दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया। दोषी वाहन के चालक गोवर्धन की मृत्यु हो जाने के फलस्वरूप उसके पिता प्रहलाद साहू को पक्षकार के रूप में संयोजित कर दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया। विचारणकाल में प्रहलाद साहू की भी मृत्यु हो जाने से उसका नाम विलोपित किया गया। उभयपक्ष को सुनने के पश्चात अधिकरण द्वारा आहत टुमेश्वर कुमार के पक्ष में ₹1,62,603/- की प्रतिकर राशि ब्याज सहित दोषी वाहन के पंजीकृत स्वामी अपीलार्थी चोवाराम साहू के विरुद्ध अधिनिर्णीत की गई। चालन अनुज्ञप्ति के अभाव में बीमा शर्तों का उल्लंघन माना जाकर बीमा कंपनी को उत्तरदायित्व से मुक्त किया गया और आदेशित किया गया कि प्रतिकर राशि का प्रथम भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा, जिसे बीमा कंपनी दोषी वाहन के पंजीकृत स्वामी अर्थात् अपीलार्थी चोवाराम साहू से वसूल कर सकेगी। उक्त निष्कर्ष को अपीलार्थी चोवाराम साहू द्वारा इस अपील में चुनौती दी गई है।

1.

4. अपीलार्थी पक्ष के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि दुर्घटना के समय दोषी वाहन का चालक गोवर्धन साहू नहीं, बल्कि अपीलार्थी का पुत्र देवेन्द्र था और इस बाबत उन्होंने अपने जवाबदावा में स्पष्ट अभिवचन किया है, देवेन्द्र का कथन कराया है फिर भी अधिकरण द्वारा उनके उक्त अभिवचन एवं साक्ष्य को मान्य न करते हुए गोवर्धन साहू को चालक मानकर त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष अंकित किया है। चालक देवेन्द्र के पास वैध चालक अनुज्ञप्ति थी। किसी प्रकार के बीमा शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है। अतः बीमा कंपनी पूर्णतः उत्तरदायी है। फलतः, अपील स्वीकार कर उनके विरुद्ध पारित “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” को अपास्त किया जाए।

2.

5. बीमा कंपनी/प्रत्यर्थी क्रमांक-2 के विद्वान अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अधिकरण द्वारा अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य का समुचित मूल्यांकन करने के पश्चात विधिसम्मत निष्कर्ष अभिलिखित किया गया है। अपीलार्थी पक्ष का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। अतः अपील खारिज की जाए।

6.

उपस्थित पक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया गया।

7.

मामले में आहत टुमेश्वर कुमार जांगड़े ने अपने न्यायालयीन साक्ष्य में स्पष्ट रूप से कथन किया है कि दुर्घटना के समय दोषी वाहन को गोवर्धन साहू चला रहा था, जिसका साक्ष्य में खण्डन नहीं हुआ है। उभयपक्ष ने यह स्थिति स्वीकार की है कि गोवर्धन की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए पुलिस द्वारा अभियोगपत्र के बजाय खात्मा पेश किया गया था। यह भी स्वीकृत तथ्य है कि गोवर्धन साहू की मृत्यु होने के फलस्वरूप दावा आवेदन में उसके पिता प्रहलाद साहू को पक्षकार के रूप में संयोजित किया गया था, किंतु विचारणकाल में प्रहलाद साहू की भी मृत्यु हो जाने से उसका नाम विलोपित कर दिया गया। टुमेश्वर कुमार के कथन का समर्थन अभिलेख में प्रस्तुत पुलिस दस्तावेज प्रदर्श पी-1 से पी-6 से भी होता है। प्रदर्श पी-6, गिरफ्तारी पत्र के अनुसार, मामले में गोवर्धन साहू की गिरफ्तारी की गई थी। इस प्रकार, दावाकर्ता पक्ष की ओर से इस बाबत स्पष्ट एवं विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध है कि दुर्घटना के समय दोषी वाहन का चालक गोवर्धन साहू था।

8.

दूसरी ओर, दोषी वाहन के पंजीकृत स्वामी चोवाराम साहू ने यह अभिवचन किया है कि दुर्घटना के समय चालक गोवर्धन साहू नहीं, बल्कि देवेन्द्र था। अपने उक्त अभिवचन को प्रमाणित करने के वास्ते देवेन्द्र कुमार का परीक्षण कराया गया है, किंतु उल्लेखनीय रूप से देवेन्द्र अथवा उसके पिता अपीलार्थी चोवाराम साहू ने इस बाबत पुलिस में किसी प्रकार की कोई शिकायत कभी नहीं की, कि दोषी वाहन के चालक के रूप में गोवर्धन साहू का नाम त्रुटिपूर्वक दर्शाया गया हो। दोषी वाहन का पंजीकृत स्वामी होने के नाते अपीलार्थी चोवाराम का यह दायित्व था कि यदि दुर्घटना के समय चालक देवेन्द्र था, तो वह पुलिस को वस्तुस्थिति से अवगत कराता, जो चोवाराम द्वारा नहीं किया गया है। ऐसी दशा में, देवेन्द्र द्वारा यह कथन करना कि दुर्घटना के समय वही दोषी वाहन का चालन कर रहा था, स्वाभाविक एवं विश्वसनीय प्रतीत नहीं होता। अतः उक्त कथन पर भरोसा किया जाना उचित नहीं है।

9.

इस प्रकार, उपरोक्त विवेचना एवं अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य के समग्र परिशीलन के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अपीलार्थी पक्ष का यह तर्क कि दुर्घटना के समय दोषी वाहन का चालक देवेन्द्र था, स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। अधिकरण द्वारा “प्रश्नाधीन अधिनियम” में गोवर्धन साहू को दोषी वाहन का चालक मानते हुए अभिलिखित निष्कर्ष अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप है। अतः उसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पायी जाती है। फलस्वरूप, अपील स्वीकार किए जाने योग्य नहीं होने से खारिज की जाती है।

10.

निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो।