High CourtsSingle Bench(2026) 09 CHH CK 4231

Chola Mandalam M.S. Insurance Company Limited vs Tulsi Sahu & Ors.

Chhattisgarh High Court · Decided on 23 September 2026

HON’BLE JUDGES
Sanjay Kumar Jaiswal, J
CASE NUMBER
MA(C) No. 708 of 2026

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Judgment

10 paragraphs · 867 words

न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल

1.

मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में एकादश अपर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रायपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा दावा प्रकरण क्रमांक 929/2023, “श्रीमती तुलसी साहू वगैरह विरुद्ध प्रदीप कुमार साहू वगैरह” में पारित अधिनियम दिनांक 29/08/2025 को चुनौती दी गई है । जिसके तहत अपीलार्थी-बीमा कंपनी के विरुद्ध ₹18,93,600/- का अधिनियम मय 7% वार्षिक ब्याज के प्रत्यर्थी क्रमांक-1 से 3 के पक्ष में पारित किया गया । जिसे आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनियम” से संबोधित किया जा रहा है ।

2.

प्रकरण के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि राजू साहू (मृतक) दिनांक 29/07/2023 को दोपहर करीब 01.00 बजे डुमरही खार खेत में काम कर रहा था, तब ट्रैक्टर क्रमांक सी.जी.-04-एन.जेड.-6469 (जिसे आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से संबोधित किया जा रहा है) को उसका चालक प्रदीप कुमार साहू (प्रत्यर्थी क्रमांक-7) तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया और खेत की मेड़ पर “दोषी वाहन” को चढ़ा दिया तथा “दोषी वाहन” को चालू अवस्था में लापरवाहीपूर्वक छोड़कर उससे उतर गया जिससे “दोषी वाहन” लुढ़ककर राजू साहू के ऊपर चढ़ गया, उसमें दबने के कारण गंभीर उपहति आने से राजू साहू की मृत्यु हो गई। उक्त घटना के संबंध में थाना-अभनपुर, रायपुर में अपराध क्रमांक 347/2023 अंतर्गत धारा 304(क) भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

1.

3. मृतक राजू साहू की पत्नी श्रीमती तुलसी साहू, माँ श्रीमती दशोदा साहू, पिता पारस राम साहू के साथ ही उसके भाई पप्पू कुमार साहू, दीपक एवं जितेन्द्र कुमार साहू द्वारा धारा 166, मोटर यान अधिनियम, 1988 के अंतर्गत दावा आवेदन प्रस्तुत किए जाने पर “दोषी वाहन” के चालक एवं स्वामी तथा अपीलार्थी बीमा कंपनी को सूचना तामील किए जाने के पश्चात उनकी ओर से कोई जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किया गया। तत्पश्चात्, जांच उपरांत अपीलार्थी बीमा कंपनी के विरुद्ध एकपक्षीय अधिनिर्णय पारित किया गया है। जिसे इस अपील में चुनौती दी गई है।

2.

4. अपीलार्थी/बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि दावाकर्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत प्रथम सूचना पत्र प्रदर्श पी-1 के अनुसार मृतक राजू साहू का नाम ही कण्डिका-7 में आरोपी के स्थान पर दर्ज है। अर्थात्, दुर्घटना के समय स्वयं राजू साहू वाहन चला रहा था। अतः राजू साहू की मृत्यु होने पर दावाकर्ता पक्ष किसी भी प्रतिकर राशि को प्राप्त करने के हकदार नहीं है। इसी प्रकार, बिना किसी साक्ष्य के मृतक राजू साहू को कुशल श्रमिक मानते हुए उसकी मासिक आय 9,000/- रुपये निर्धारित की गई है, जो अधिक है। उसे कुशल श्रमिक मानने के संबंध में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। घटना दिनांक को प्रचलित अकुशल श्रमिक की मजदूरी के आधार पर उसकी मासिक आय निर्धारित की जा सकती थी। दावाकर्ता पक्ष की ओर से परीक्षित अमर सिंह का कथन भी विश्वसनीय नहीं है। अतः अपीलार्थी के विरुद्ध पारित “प्रश्नाधीन अधिनियम” को अपास्त करते हुए उसे दायित्व से मुक्त किया जाए।

5.

उपस्थित पक्ष का तर्क श्रवण किया गया तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया गया।

6.

अभिलेख के परिशीलन से यह स्थिति स्पष्ट होती है कि “दोषी वाहन” दुर्घटना दिनांक को अपीलार्थी बीमा कंपनी से बीमित थी। मामले में दावाकर्ता पक्ष की ओर से मृतक की पत्नी श्रीमती तुलसी साहू के अलावा मौके के साक्षी के रूप में अमर सिंह का परीक्षण कराया गया है, जिन्होंने घटना के संबंध में दावाकर्ता पक्ष के मामले की पुष्टि की है। उनके कथन का कोई प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया है, जिसके कारण उनका कथन अखण्डित रहा है। यह भी स्पष्ट है कि पुलिस द्वारा विवेचना उपरांत अंतिम प्रतिवेदन “दोषी वाहन” के चालक प्रदीप कुमार साहू के विरुद्ध प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार दुर्घटना में “दोषी वाहन” के चालक के रूप में प्रदीप कुमार साहू को उत्तरदायी पाया गया है। न्यायालय के समक्ष दिया गया मौखिक कथन ही मूल साक्ष्य होता है, जबकि प्रथम सूचना पत्र एक समर्थनकारी साक्ष्य है। प्रथम सूचना पत्र में लिखाए गए तथ्य को स्थापित करने हेतु सूचक तिलेश्वर कुमार साहू का न्यायालय के समक्ष परीक्षण नहीं कराया गया है। अतः प्रथम सूचना पत्र में उल्लेखित तथ्य मात्र के आधार पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अमर सिंह के कथन का खण्डन नहीं होता। ऐसी स्थिति में अपीलार्थी/बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क कि दुर्घटना में स्वयं मृतक की लापरवाही रही है, स्वीकार योग्य नहीं है।

7.

जहाँ तक मृतक की मासिक आय 9,000/- रुपये अधिक निर्धारित किए जाने का प्रश्न है? इस संदर्भ में, उल्लेखनीय है कि दुर्घटना दिनांक 29/07/2023 की बताई गई है और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत उक्त तिथि को अकुशल श्रमिक के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी 9,960/- रुपये थी। ऐसी स्थिति में मृतक की मासिक आय 9,000/- रुपये निर्धारित किया जाना उक्त तिथि को अकुशल श्रमिक के लिए निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। अतः अपीलार्थी पक्ष का यह तर्क भी स्वीकार योग्य नहीं है कि मृतक की मासिक आय अधिक निर्धारित की गई है।

8.

ऐसी दशा में, उपरोक्त विवेचना के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अपीलार्थी-बीमा कंपनी का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है। अधिकरण द्वारा पारित “प्रश्नाधीन अधिनियम” अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप होने से उसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पायी जाती। फलस्वरूप, अपील स्वीकार योग्य नहीं होने से खारिज की जाती है।

9.

निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो।