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Judgment
The present appeal has been preferred by the appellant for setting aside the award dated 17/05/2019 passed by the learned Motor Accident Claims Tribunal, Bikaner (Labour Court & Industrial Dispute Tribunal, Bikaner) in Motor Accident Claim Case No. 292/2010 (678/2014).
The claimants/respondents preferred a claim petition on various grounds before the learned tribunal for grant of compensation. The reply was filed on behalf of the appellant denying the allegations in the claim petition. Thereafter, on completion of the pleadings the learned Tribunal framed the issues.
After hearing the counsel for the parties, the learned Tribunal decided the claim petition of the claimants/respondents and awarded a sum of Rs.2,25,000/- in favour of the claimants/ respondents and directed to pay an interest @ 7% per annum on the amount awarded.
Counsel for the appellant submits that although it was submitted before the Tribunal that there was no negligence of the offending vehicle insured with the appellant, however, on the basis of material produced before the Tribunal and on appreciation of the evidence, it was proved that the offending vehicle which was insured with the appellant was negligent and because of the rash and negligent driving by the driver of the offending vehicle, the accident had occurred resulting into the death of Babulal who was 11 years of age. Secondly, learned counsel for the appellant submits that although the vehicle was having the permit for plying in the area, however, the area where the accident took place was not specifically named in the permit.
I have considered the submissions made at the bar and perused the material available on record.
The findings recorded by the Tribunal on the issue Nos.1 and 3 specifically which are reproduced hereinbelow for ready reference.
Finding on issue No.1 :
"10. ये दोनों विवाद्यक एक दूसरे से संबंधित होने के कारण सुविधा की दृष्टि से इन दोनों विवाद्यकों का निस्तारण एक साथ किया जा रहा है। विवाद्यक सं0 1 के तहत प्रार्थीगण को यह सिद्ध करना था कि आया प्रष्नगत वाहन संख्या R.J.-23-P-0871 के चालक विपक्षी संख्या 02 के द्वारा दिनांक 14.05.2009 को सड़क आम रोही डूंगरगढ से वाया रतनगढ़ सड़क पर नजद खेत उमेदाराम जाट रोही कितासर भाटियान पर उक्त वाहन को उपेक्षा/उतावलेपन से चला कर की गई दुर्घटना में आई चोटों के परिणाम स्वरूप बाबुलाल की मृत्यु हुई ? तथा विवाद्यक सं. 2 के तहत यह सिद्ध करना था कि आया उक्त वाहन चालक उक्त वाहन के स्वामी विपक्षी सं0 01 के नियोजन में होकर उसके हितार्थ व लाभार्थ कार्य कर रहा था ?
मैंने इस संदर्भ में प्रस्तुत क्लेम याचिका का अवलोकन किया। क्लेम याचिका में प्रार्थीगण यह निवेदन करके आये है कि मृतक बाबुलाल अपने ताऊ हरिराम के साथ अपना खेत संभालने के लिये अपने गांव कीतासर भाटियान से रतनगढ़ की तरफ सड़क के किनारे किनारे अपनी साइड में जा रहा था ज्योंहि मृतक व अन्य साथी कीतासर से 5 कि.मी.रतनगढ़ की तरफ नजद खेत उमेदाराम जाट के पास पहूचे तब सामने से एक बस नं. आर.जे.-23-पी-0871 तेजी एवं लापरवाही से चलाकर अपनी साईड में चल रहे मृतक बाबूलाल के टक्कर मारी जिससे मृतक बाबुलाल सड़क पर गिर गया और मौके पर ही मृत्यु हो गई। दुर्घटना का एक मात्र कारण बस ड्राइवर बस को गफलत तेजी एवं लापरवाही से चलाने के कारण घटित हुई।
मैंने इस संदर्भ में प्रार्थीगण पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य का अवलोकन किया। साक्ष्य प्रार्थी में ए0डब्लू0 1 गिरधारी राम मृतक बाबूलाल का पिता है। इस गवाह ने अपनी मुख्य परीक्षा में दिये शपथ पत्र में क्लेम याचिका में अंकित तथ्यों की पुष्टि में बयान दिये हैं। इस गवाह से दस्तावेजी साक्ष्य में प्रदर्ष-1 लगायत प्रदर्ष-13 तक के दस्तावेजात प्रदर्षित करवाये गये जिरह में यह गवाह इस सुझाव को गलत बतलाता है कि मैंने दुर्घटना ना देखी हो। यह सही है कि जब तक मैं घटना स्थल पर पहूॅचा तब तक मेरे पुत्र की मृत्यु हो चुकी थी।
अप्रार्थीगण की ओर से एन.ए.डबलू. 1 षिव शंकर मोदी को परीक्षित करवाया है। यह गवाह घटना का चष्मदीद गवाह नहीं होने के कारण यह गवाह घटना के संदर्भ में कोई कथन नहीं करता है।
उक्त घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रदर्ष-1 दर्ज करवाई गई है। दौराने अन्वेषण घटना स्थल का नक्षा मौका प्रदर्ष-3 बनाया गया। नक्षा मौका प्रदर्ष-3 के अवलोकन से उक्त दुर्घटना "X" स्थान पर घटित होना स्पष्ट होता है। उक्त दुर्घटना में आई चोटों की वजह से बाबुलाल की मृत्यु होना पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रदर्ष-5 से स्पष्ट होता है। वरवक्त दुर्घटना उक्त बस को चालक मोहनलाल ही चला रहा था इस तथ्य की पुष्टि नोटिस प्रदर्ष-10 में दिये गये जवाब से होती है। पुलिस द्वारा बाद अन्वेषण चार्जषीट प्रदर्ष-2 वाहन चालक मोहनलाल के विरूद्ध ही प्रस्तुत की गई है।
इस प्रकार प्रार्थीगण द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य से यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट होता है कि वरवक्त दुर्घटना आपराधिक वाहन बस को अप्रार्थी सं. 2 मोहनलाल द्वारा तेजगति, गफलत एवं लापरवाही से चला रहा था जिसके कारण उक्त दुर्घटना घटित हुई। तथा उक्त दुर्घटना में आयी चोटों के परिणामस्वरूप बाबुलाल की मृत्यु हो गई। पुलिस द्वारा की गई अन्वेषण कार्यवाही से भी यह तथ्य भलीभांति स्पष्ट होता है कि वरवक्त दुर्घटना आपराधिक वाहन को अप्रार्थी मोहनलाल द्वारा उतावलेपन से चलाये जाने के कारण उक्त दुर्घटना घटित हुई। प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत साक्षी के खण्डन में अप्रार्थीगण की ओर से किसी प्रकार की कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की गई अतः ऐसी स्थिति में प्रार्थीगण अपनी दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य में यह तथ्य पूर्णरूप से साबित करने में सफल रहे हैं कि वाहन संख्या R.J.-23-P-0871 के चालक विपक्षी संख्या 02 के द्वारा दिनांक 14.05.2009 को सड़क आम रोही डूंगरगढ़ से वाया रतनगढ़ सड़क पर नजद खेत उमेदाराम जाट रोही कितासर भाटियान पर उक्त वाहन को उपेक्षा/उतावेलपन से चला कर की गई दुर्घटना में आई चोटों के परिणाम स्वरूप बाबुलाल की मृत्यु हुई।"
Finding on issue No.3 :
"20. इस विवाद्यक के तहत अप्रार्थी सं. 3 बीमा कंपनी को यह सिद्ध करना था कि आया विपक्षी संख्या 03 बीमा कम्पनी अपने उल्लेखित कथन में प्रारम्भिक आपत्तियों एवं विषेष कथन के मध्य अपने दायित्व से मुक्त हो सकता है, नहीं तो इसका प्रभाव ?
जहां तक अप्रार्थी सं. 3 बीमा कंपनी को दायित्व से मुक्त किये जाने का प्रष्न है तो इस संदर्भ में हमने अप्रार्थी सं.3 द्वारा प्रस्तुत जवाब का अवलोकन किया गया जिसमें उन्होंने प्रथम एतराज यह लिया है कि तथाकथित दुर्घटना बालक बाबुलाल द्वारा वरवक्त दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग एन.एच. 11 पर बिना इधर उधर देखे बिना यातायात नियमों की पालना किये गफलत व लापरवाही से सड़क क्रॉस करते समय उसकी एक मात्र गफलत व लापरवाही के कारण घटित हुई है। इसलिये तथाकथित दुर्घटना के लिए मृतक स्वयं जिम्मेवार है। द्वितीयतः वह अंषदायी रूप से दोषी है। उनके द्वारा दूसरा एतराज यह लिया गया है कि वरवक्त दुर्घटना तथाकथित वाहन बस चालक के पास तथाकथित वाहन चलाने का कोई वैध और प्रभावी लाईसेंस नहीं था। वरवक्त दुर्घटना तथाकथित वाहन मालिक के पास तथाकथित वाहन को परिवहन किये जाने के लिये कोई वैध फिटनेस व परमिट नहीं था। इस कारण पॉलिसी शर्तों का खण्डन होने के कारण अप्रार्थी सं. 3 उत्तरदाता का कोई किसी प्रकार का दायित्व नहीं है। जिसका समर्थन में उनकी ओर से गवाह एन.ए.डबलू. 1 षिव शंकर मोदी ने अपने बयानों में किया है तथा इसका समर्थन उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य से भी होता है। इसके अतिरिक्त अपने इसके समर्थन में हमारे समक्ष निम्न सम्मानीय न्यायिक दृष्टान्त भी प्रस्तुत कर अपने दायित्व से मुक्त किये जाने का निवेदन किया है :-
1- MACD 2018 (3) (SC) Page 202 Amrit Poul Singh & Anr. Vs Tata AIG General Insurance Co. Ltd. & Ors.
2- MACD 2018(3)(M.P.) Page 1620 Rajkumari (Smt.) Ors. Vs Smt Anju Sharma & Ors.
22- हमने इस संदर्भ में अप्रार्थी सं. 3 बीमा कंपनी की ओर से गवाह शिव शंकर मोदी एन.ए.डब्लू. 1 की साक्ष्य एवं प्रस्तुत सम्मानीय न्यायिक दृष्टान्तों का अवलोकन किया। जहां तक प्रथम एतराज कि तथाकथित दुर्घटना बालक बाबुलाल द्वारा वरवक्त दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्ग एन.एच. 11 पर बिना इधर उधर देखे बिना यातायात नियमों की पालना किये गफलत व लापरवाही से सड़क क्रॉस करते समय उसकी एक मात्र गफलत व लापरवाही के कारण घटित हुई है। इसलिये तथाकथित दुर्घटना के लिए मृतक स्वयं जिम्मेदार है। द्वितीयतः वह अंषदायी रूप से दोषी है, का प्रष्न है तो इस संदर्भ में अप्रार्थी बीमा कंपनी की कोई साक्ष्य नहीं है। अतः साक्ष्य के अभाव में अप्रार्थी बीमा कंपनी का यह एतराज स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। जहां तक अप्रार्थी सं. 3 बीमा कंपनी का दूसरा एतराज कि वरवक्त दुर्घटना तथाकथित वाहन बस चालक के पास तथाकथित वाहन चलाने का कोई वैध और प्रभावी लाईसेंस नहीं था। वरवक्त दुर्घटना तथाकथित वाहन मालिक के पास तथाकथित वाहन को परिवहन किये जाने के लिये कोई वैध फिटनैस व परमिट नहीं था। इस संदर्भ में अप्रार्थी बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत साक्षी एन.ए.डब्लू. 1 षिव षंकर मोदी की साक्ष्य का अवलोकन किया गया। गवाह एन.ए.डब्लू.1 षिव षंकर मोदी ने अपनी मुख्य परीक्षा में कथन किया है कि बीमा कंपनी द्वारा उक्त प्रकरण में अन्वेक्षक नरेष कुमार माथुर को नियुक्त किया गया था। जिस पर उनके द्वारा उक्त बीमित वाहन बस के परमिट के सत्यापन की रिपोर्ट सम्बन्धित संबंधित डी.टी.ओ. कार्यालय सीकर से प्राप्त करने हेतु परमिट की फोटो प्रति दी गई। आगे यह गवाह यह भी कथन करता है कि डी.टी.ओ. कार्यालय सीकर से अन्वेक्षक के दौरान प्राप्त प्रमाणित प्रति परमिट/परिचालन पत्र रिकार्ड प्रति के अनुसार उक्त वाहन बस राजपालसिंह पुत्र बंजरग सिंह निवासी तारपुरा सीकर परमिट संख्या 2535 जारी दिनांक 23.3.2005 से 22.03.10 37 सीट का परमिट, परमिट में अंकित या कथित स्थानों के लिये जारी किया गया था। परमिट में दुर्घटना का स्थान गावं कीतासर भाटियान अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में बीमा पॉलिसी एवं शर्तों के अनुसार वरवक्त दुर्घटना तथाकथित दुर्घटना स्थान कीतासर भाटियान हेतु उक्त बीमित वाहन बस परिवहन के लिये वैध एवं प्रभावी श्रेणी का परमिट नहीं था। ऐसी स्थिति में बीमा पॉलिसी शर्तों का बीमा धारक द्वारा जानबूझकर उल्लंघन कर बिना वैध परमिट परिवहन किया गया जो पॉलिसी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसी स्थिति में बीमा कम्पनी का प्रार्थीगण के क्लेम के प्रति कोई किसी प्रकार का दायित्व नहीं बनता है। इस गवाह से दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में प्रदर्ष एन.ए.-1 लगायत प्रदर्ष एन.ए.-6 तक के दस्तावेजात प्रदर्षित करवाये गये हैं। जब इस गवाह से जिरह की गई तो इस गवाह ने अपनी जिरह में यह स्पष्ट रूप से कथन किया है कि दुर्घटना स्थल रतनगढ़ से डूॅगरगढ़ के बीच में आता हो तो मुझे इसी जानकारी नहीं है। इस प्रकार इस गवाह की जिरह से यह स्पष्ट है कि दुर्घटना स्थल रोही कितरासर भाटियान रतनगढ से डूगरगढ के बीच आता है तो इसकी जानकारी इस गवाह को नहीं है। इसके अतिरिक्त इस प्रकरण में अन्वेक्षक एवं डी.टी.ओ.कार्यालय के किसी भी सक्षम अधिकारी को साक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया है। अतः ऐसी स्थिति में यही माना जावेगा कि वरवक्त दुर्घटना वाहन मालिक एवं वाहन चालक के पास आपराधिक वाहन बस को चलाने का वैध एवं प्रभावी परमिट था। अतः ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी को अपने दायित्व से मुक्त नहीं किया जा सकता।"
The above discussion of the Tribunal clearly shows that negligence of the offending vehicle is clearly proved by the documentary evidence and, therefore, the finding recorded on issue No.1 is absolutely just and proper. So far as finding on the issue No.3 is concerned, it has nowhere been brought on record that the permit in question was not for plying the bus on the route where the accident had taken place. Therefore, the finding recorded by the Tribunal is perfectly just and proper.
In view of the discussion made above, the appeal is bereft of merit and the same is, hereby, dismissed. The stay application and other pending application, if any also stand dismissed.
