AI Structured Summary
Not yet generated for this judgment
Judgment
यह विविध प्रार्थना पत्र वक्फ बोर्ड अधिकरण, जयपुर द्वारा पारित आदेश दिनांक 31.10.2019 के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया है जिसके द्वारा विद्वान अधिकरण ने अप्रार्थीगण द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अन्तर्गत आदेश 7 नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता को स्वीकार किए जाने का आदेश दिया।
प्रकरण के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार से है कि प्रार्थी मनोज कुमार द्वारा एक प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम, 1995 इस आशय का पेश किया गया कि प्रार्थी वक्फ संपत्ति की दुकान संख्या 31 का किरायेदार है। उपरोक्त संपत्ति प्रार्थी के पिता स्व. कन्हैयालाल सोनी ने सन् 1971 में मोहम्मद शाह से किराये पर ली थी। उसके पश्चात् हिम्मतसिंह नागोरी ने संपत्ति क्रय कर मालिक होने के आधार पर किराया प्राप्त करना आरंभ कर दिया। तत्पश्चात अप्रार्थी संख्या 1 मोहम्मद इब्राहिम खान ने मार्च 2011 में यह जाहिर किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय से वक्फ बोर्ड के हक में निर्णय पारित हो गया है एवं जिसके आधार पर जनवरी 2010 से अप्रार्थी संख्या 1 मोहम्मद इब्राहिम खान ने दुकान संख्या 1 का किराया तलब किया और दुकान का किराया 100/- रूपये से बढ़ाकर 1000/- प्रतिमाह कर दिया। प्रार्थी उपरोक्त दुकान में विधिवत रूप से किरायेदारै व "सोनी ई-मित्र" के नाम से व्यवसाय करता है। दिनांक 26.11.2016 को अप्रार्थी संख्या 1 मोहम्मद इब्राहिम खान ने अपने अधिवक्ता के जरिये नोटिस दिलवाया जिसके द्वारा प्रार्थी से दुकान खाली कर 22 माह का किराया तलब किया गया। इस प्रार्थना पत्र में यह भी कथन किया गया कि अप्रार्थी संख्या 3 उपखण्ड मजिस्ट्रेट गिर्वा, उदयपुर का आदेश दिनांक 28.08.2019 जो प्रार्थी को पुलिसथाना भोपालपुरा का एक सिपाही दिनांक 03.09.2019 को देकर गया जिसमें सात दिवस में दुकान खाली करने का आदेश विजय कुमार मार्फत राजेन्द्र ऑटो मोबाइल के नाम से दिया गया है। प्रार्थी ने उपखण्ड मजिस्ट्रेट, गिर्वा के समक्ष उपस्थित हो दिनांक 11.09.2019 को लिखित में यह निवेदन किया कि विजय कुमार का दुकान से कोई संबंध नहीं है, प्रार्थी दुकान का विधिवत किरायेदार है व नियमित रूप से किराया अदा कर रहा है। प्रार्थना पत्र में निवेदन किया गया कि प्रार्थी को किरायेसुदा दुकान से बेदखल नहीं करे।
अप्रार्थी संख्या 1 मोहम्मद इब्राहिम खान की ओर से प्रार्थना पत्र अन्तर्गत आदेश 7 नियम 11 व धारा 151 व्यवहार प्रक्रिया संहिता पेश कर मुख्य रूप से निवेदन किया गया कि प्रार्थी कभी भी अप्रार्थी संख्या 1/वक्फ बोर्ड का किरायेदार नही रहा है बल्कि वादग्रस्त दुकान में विजय कुमार किरायेदार था। प्रकरण संख्या 14/2013 में पारित आदेश दिनांक 25.10.2013 के संबंध में दिनांक 03.09.2019 को पुलिसथाना गोपालपुरा द्वारा सम्मन देकर सात दिवस में दुकान खाली करने का आदेश देना बताया है और उक्त आदेश विजय कुमार के विरूद्ध होना बताया है। इसमें यह भी अंकित किया गया है कि प्रार्थी द्वारा पुलिसथाना गोपालपुरा के मार्फत जो नोटिस प्राप्त किया गया है उक्त नोटिस की पुश्त पर प्रार्थी ने स्पष्ट रूप से अंकित किया है कि :-
"मैं मनोज सौनी, ेवदप म्उपजतं जो मेरे बड़े भाई विजय कुमार सौनी के नाम पर है, उनका स्वस्थ्य ठीक नहीं होने से मैं दुकान चला रहा हूँ, मैंने छव्ज्प्ब्म् की एक तरफा बवचमम प्राप्त की।"
इस प्रकार प्रार्थी ने स्वयं के हाथ से अंकित कर हस्ताक्षर किये हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रार्थी वादग्रस्त दुकान में किरायेदार नहीं है बल्कि अपने भाई विजय कुमार के अस्वस्थ होने के कारण उसकी ओर से दुकान पर बैठकर व्यवसाय करता है। अतः इस प्रकार प्रार्थी को अप्रार्थीगण के विरूद्ध किसी प्रकार का वादकारण उत्पन्न नहीं हुआ है। विद्वान अधिकरण ने अपने आदेश दिनांक 31.10.2019 के द्वारा प्रार्थना पत्र अन्तर्गत आदेश 7 नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता स्वीकार कर प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम,1995 को वादकारण के अभाव में खारिज किये जाने का आदेश दिया जिसके विरूद्ध यह विविध प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है।
प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा तर्क दिया गया कि विद्वान अधिकरण ने विपक्षीगण द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना पत्र अन्तर्गत आदेश 7 नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता स्वीकार करने में त्रुटी की है। उनका तर्क है कि प्रार्थी ही विवादित दुकान का किरायेदार है और वह लगातार विवादित दुकान का किराया अदा करता चला आ रहा है। जिस दुकान के संबंध में उपखण्ड मजिस्ट्रेट, गिर्वा द्वारा विजय कुमार को बेदखली का आदेश दिनांक 28.08. 2019 पारित किया है, वह भिन्न दुकान का है। विजय कुमार का मौजूदा विवादग्रस्त दुकान से कोई संबंध नहीं है। विपक्षीगण अप्रार्थी संख्या 3 उपखण्ड मजिस्ट्रेट, गिर्वा के उक्त आदेश दिनांक 28.08.2019 की आड़ में प्रार्थी को दुकान से बेदखल करना चाहते हैं जबकि प्रार्थी विवादग्रस्त दुकान का विधिवत किरायेदार है। अतः विद्वान अधिकरण के आदेश दिनांक 31.10.2019 को अपास्त किया जाये।
सुना गया। न्यायालय द्वारा विद्वान अधिवक्ता प्रार्थी के तकोंर् पर मनन किया एवं पत्रावली पर उपलब्ध सामग्री का परिशीलन किया गया।
पत्रावली के अवलोकन से प्रकट होता है कि प्रार्थी ने स्वयं को किरायेदार होना बताते हुए किरायानामे की प्रति एवं किराया जमा कराने की रसीद की प्रति पेश की है। इन दोनों ही दस्तावेज में दुकान के नंबर अंकित नहीं है। पत्रावली पर अप्रार्थी संख्या 1 मोहम्मद इब्राहिम खान के अधिवक्ता श्री कमर हुसैन का रजिस्टर्ड नोटिस दिनांक 26.11.2016 उपलब्ध है जिसके द्वारा प्रार्थी मनोज कुमार सोनी को मोहम्मद इब्राहिम खान की दुकान संख्या 1 का किरायेदार होना बताया गया है तथा इस नोटिस के माध्यम से प्रार्थी की किरायेदारी समाप्त की जाकर दुकान का खाली कब्जा भूस्वामी को देना कहा गया है।
पत्रावली पर अप्रार्थी संख्या 3 उपखण्ड मजिस्ट्रेट, गिर्वा का आदेश दिनांक 28.08.2019 उपलब्ध है जिसके द्वारा दुकान नंबर 31 पर विजय कुमार को अतिक्रमी घोषित करते हुए विजय कुमार को आदेशित किया गया है कि वह दुकान नंबर 31 से अपना अतिक्रमण हटाकर उसका कब्जा वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधि को सात दिवस के भीतर सुपुर्द करे अन्यथा नियमानुसार कार्यवाही कर अतिक्रमण हटाया जायेगा। उक्त आदेश के पश्चात प्रार्थी द्वारा विद्वान अधिकरण के समक्ष प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम,1995 प्रस्तुत किया गया जिसमें स्वयं को दुकान संख्या 31 का किरायेदार होना बताया तथा उक्त दुकान से बेदखल न करने का अनुतोष चाहा।
आदेश 7 नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता के प्रार्थना पत्र में अप्रार्थी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि दिनांक 03.09.2019 को पुलिसथाना गोपालपुरा के मार्फत जो नोटिस भेजा गया उसमें स्वयं प्रार्थी ने दुकान में अपने बड़े भाई विजय कुमार सोनी को किरायेदार होना बताया और उनका स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण स्वयं द्वारा दुकान चलाना बताया है।
अतः इस प्रकार स्पष्ट है कि प्रार्थी दुकान संख्या 31 का किरायेदार नहीं है बल्कि दुकान संख्या 31 प्रार्थी के बड़े भाई विजय कुमार के पास किराये पर है। ऐसा प्रतीत होता है कि जब दुकान संख्या 31 पर प्रार्थी के बड़े भाई विजय कुमार को अतिक्रमी घोषित कर दिया गया और उसे नोटिस तारीख 28.08.2019 देकर आदेशित किया गया कि वह सात दिवस के भीतर दुकान का कब्जा सौंप दे अन्यथा दुकान से अतिक्रमण हटा दिया जायेगा। उसके तुरंत पश्चात् दिनांक 17.09.2019 को प्रार्थी द्वारा प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम 1995 प्रस्तुत कर स्वयं को दुकान संख्या 31 का किरायेदार होना बताकर दुकान से बेदखल न करने का अनुतोष चाहा। प्रार्थी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पत्रावली पर प्रस्तुत नहीं किया गया है जिसमें प्रार्थी को दुकान संख्या 31 का किरायेदार होना बताया गया हो बल्कि जो नोटिस कमर हुसैन अधिवक्ता के जरिये दिया गया उसमें प्रार्थी को दुकान संख्या 1 का किरायेदार होना बताया गया है तथा किरायानामा व रसीद पेश की गई है उसमें दुकान संख्या अंकित नहीं है। ऐसी स्थिति में दुकान संख्या 31 में प्रार्थी को कोई हित न होने के कारण उसे प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम, 1995 पेश करने का कोई वादकारण ही उत्पन्न नहीं होता है।
ऐसी सूरत में विद्वान अधिकरण द्वारा आदेश 7 नियम 11 व्यवहार प्रक्रिया संहिता के प्रार्थना पत्र के तहत प्रार्थी का प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 83(2) वक्फ अधिनियम,1995 को खारिज करने का आदेश दिया है उसमें यह न्यायालय किसी प्रकार की त्रुटी होना नहीं पाता है।
अतः मौजूदा सिविल विविध प्रार्थना पत्र खारिज किये जाने योग्य होने से खारिज किया जाता है। तदनुसार, स्थगन प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है।
