High CourtsSingle Bench(2026) 10 CHH CK 2108

Chinesh Khamhari @ Kunu vs State Of Chhattisgarh

Chhattisgarh High Court, Bilaspur · Decided on 15 October 2026

HON’BLE JUDGES
Sanjay Kumar Jaiswal, J
RESULT
Allowed
CASE NUMBER
Cr. A. No. 2567 of 2026

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Judgment

9 paragraphs · 1,020 words
1.

धारा 14(क)(ii) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (जिसे आगे संक्षेप में "विशेष अधिनियम" कहा गया है) के अंतर्गत जमानत संबंधी प्रस्तुत द्वितीय अपील में विचारण न्यायालय-विशेष न्यायाधीश (विशेष अधिनियम), रायगढ़, छत्तीसगढ़ द्वारा पुलिस थाना-तमनार, रायगढ़, छत्तीसगढ़ के अपराध क्रमांक-309/2025 अंतर्गत धारा 296, 351(2), 351(3), 115(2), 109(1), 221, 132, 74, 76, 309(4), 309(6), 3(5), 310(2), 121(1), 77, 351(3), 61(2), 238 भारतीय न्याय संहिता, 2023, विशेष अधिनियम की धारा 3(2)(v) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा-66(ड), 67(क) के तहत प्रस्तुत नियमित जमानत आवेदन में पारित आदेश दिनांक 17/09/2026 को चुनौती दी गई है जिसके तहत अपीलार्थी/अभियुक्त का नियमित जमानत आवेदन निरस्त कर दिया गया। उक्त आदेश को संक्षेप में “प्रश्नाधीन आदेश” से संबोधित किया जा रहा है।

1.

2. अभियोजन मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि पीड़िता थाना पूंजीपथरा, जिला रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में महिला आरक्षक के पद पर पदस्थ है। तमनार थाना क्षेत्र, जिला रायगढ़ में स्थित जिंदल कंपनी से संबंधित जनसुनवाई के विरोध में विभिन्न मुद्दों को लेकर लगभग 14 ग्रामों के ग्रामीण सी.एच.पी. चौक, लिबरा में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। उक्त प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु रायगढ़ जिले के विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। दिनांक 27.12.2025 को एकत्रित प्रदर्शनकारी, अन्य सह-अभियुक्तों जैसे राजेश मरकाम आदि के उकसावे पर उग्र एवं हिंसक हो गए। उन्होंने पुलिस द्वारा शांति बनाए रखने की अपील की उपेक्षा करते हुए अनियंत्रित होकर प्राणघातक हमला प्रारंभ कर दिए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में लाठी-डंडे आदि थे। इसी दौरान पीड़िता, जो महिला आरक्षक है, अपनी सुरक्षा हेतु खेत की ओर भागी, किंतु गड्ढे में पैर फंसने से गिर पड़ी। तभी लगभग 7-8 प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया और उसकी हत्या करने की नियत से अश्लील गाली-गलौज करते हुए तथा जान से मारने की धमकी देते हुए उस पर हाथ-मुककों, लात-घूसों एवं लाठी-डंडों से प्रहार किया। पीड़िता की लज्जा भंग करने की नीयत से उसके दोनों पैर उठाकर उसके वस्त्रों को गले एवं वक्षस्थल के पास से खींचकर फाड़ दिया तथा अंतःवस्त्र को भी खींचते हुए उसे घसीटा। पीड़िता प्राणरक्षा हेतु बार-बार निवेदन करती रही, परंतु उसकी वर्दी के कपड़े फाड़कर उस पर हँसते रहे। वह असहाय अवस्था में अपने स्तनों को दोनों हाथों से ढंककर रोती-बिलखती रही। सह-अभियुक्त मंगल राठिया द्वारा डंडे से उसकी पीठ पर प्रहार किया गया तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा भी मारपीट की गई। इसी बीच एक व्यक्ति द्वारा उसके अर्धनग्न अवस्था का वीडियो मोबाइल फोन से बनाकर प्रसारित कर दिया गया। अभियुक्तों ने उसका गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया, जिससे वह किसी प्रकार अपने अंतःवस्त्र को छोड़कर जान बचाकर वहां से भागने में सफल हुई। इसी घटना में महिला थाना प्रभारी तमनार, रायगढ़ के साथ भी अश्लील गाली-गलौज एवं मारपीट की गई तथा उसके सिर को हाईवा वाहन से कुचलने का प्रयास किया गया और उसे जान से मारने की धमकी दी गई। उक्त घटना की रिपोर्ट पर थाना तमनार, जिला रायगढ़ द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया गया। तत्पश्चात् आहतों का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, साक्षियों के कथन दर्ज किए गए तथा संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियुक्तों के विरुद्ध अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया।

3.

इस अपील के संबंध में पीड़िता/शिकायतकर्ता संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आभासी रूप से उपस्थित होकर अपीलार्थी/अभियुक्त को जमानत दिए जाने पर आपत्ति होने की अभिव्यक्ति की गई।

4.

अपीलार्थी/अभियुक्त के विद्वान अधिवक्ता ने तर्क प्रस्तुत किया है कि अपीलार्थी का प्रथम जमानत आवेदन दिनांक 08/05/2026 को निरस्त हुआ था। उस समय विचारण प्रारंभ नहीं हुआ था तथा पीड़िता का बयान भी दर्ज नहीं हुआ था, जबकि तत्पश्चात पीड़िता का बयान हो चुका है और उसके न्यायालयीन बयान में अपीलार्थी/अभियुक्त के कृत्य के संबंध में कोई स्पष्ट कथन नहीं किया गया है। सह-अभियुक्त माधव गुप्ता उर्फ माधव बिसी का जमानत आवेदन इस न्यायालय द्वारा दिनांक 24/09/2026 को स्वीकार किया जा चुका है। अपीलार्थी दिनांक 02/01/2026 से निरंतर अभिरक्षा में है। प्रकरण में कुल 63 साक्षियों में से मात्र 01 साक्षी का परीक्षण हुआ है तथा विचारण में समय लगना संभावित है। अतः विचारण न्यायालय द्वारा पारित “प्रश्नाधीन आदेश” को अपास्त करते हुए, बदली हुई परिस्थितियों में प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाए तथा अपीलार्थी/अभियुक्त को नियमित जमानत का लाभ प्रदान करते हुए रिहा किए जाने का आदेश पारित किया जाए।

5.

उत्तरवादी/राज्य के विद्वान अधिवक्ता ने प्रस्तुत अपील का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया है कि अपीलार्थी घटनाक्रम का वीडियो बनाकर उसे प्रसारित करने वाला मुख्य अभियुक्त है, जिसकी शिनाख्त परेड भी हुई है तथा उसके कब्जे से मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है। जमानत पर रिहा किए गए सह-अभियुक्त माधव गुप्ता उर्फ माधव बिसी का प्रकरण अपीलार्थी से भिन्न है। घटना के समय अपीलार्थी भी मौके पर उपस्थित था। अतः अपीलार्थी की भूमिका तथा अपराध की प्रकृति एवं गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए विचारण न्यायालय द्वारा पारित “प्रश्नाधीन आदेश” पूर्णतः उचित एवं विधिसम्मत है, जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। अतः प्रस्तुत जमानत संबंधी अपील निरस्त किया जाए।

6.

उभयपक्ष का तर्क श्रवण किया तथा अभिलेख एवं केस डायरी का परिशीलन किया गया ।

7.

अभिलेख के परिशीलन से यह परिलक्षित होता है कि अपीलार्थी की प्रथम जमानत संबंधी अपील निरस्त किए जाने के समय पीड़िता का न्यायालयीन बयान दर्ज नहीं हुआ था, किंतु तत्पश्चात पीड़िता का न्यायालयीन बयान दर्ज हो चुका है । अपीलार्थी/अभियुक्त दिनांक 02/01/2026 से निरंतर न्यायिक अभिरक्षा में है तथा प्रकरण में कुल 63 साक्षियों में से अब तक मात्र 01 साक्षी का परीक्षण हुआ है । विचारण में समय लगना संभावित है । अपीलार्थी के न्यायालयीन कथन तथा उक्त समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, यह न्यायालय पाती है कि वर्तमान प्रकरण में बदली हुई परिस्थितियाँ अपीलार्थी/अभियुक्त को नियमित जमानत का लाभ प्रदान करने के लिए पर्याप्त हैं । अतः अपीलार्थी/अभियुक्त द्वारा प्रस्तुत जमानत संबंधी अपील स्वीकार किए जाने योग्य है । फलतः प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है तथा विचारण न्यायालय द्वारा पारित “प्रश्नाधीन आदेश” अपास्त किया जाता है ।

8.

अपीलार्थी/अभियुक्त दाण्डिक प्रकरण के निराकरण तक विचारण न्यायालय में अपनी नियमित उपस्थिति हेतु ₹25,000/- (पच्चीस हजार रुपये) का बंधपत्र एवं उतनी ही राशि का सक्षम जमानत प्रस्तुत करें तो उसे जमानत पर रिहा किया जाए ।

9.

रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की प्रतिलिपि यथाशीघ्र विचारण न्यायालय को सूचनार्थ व अनुपालनार्थ प्रेषित की जाए ।